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मर्त और बारन
उनकी नज़रें मिलीं। उस नज़र में अठारह साल की लड़ाई, अठारह साल की वफ़ादारी, अठारह साल की थकान थी।
**कुर्सी के दो मालिक**
घर, शहर की सबसे छोर की गली में, पीली पेंट की हुई, एक मंज़िला जगह थी। अंदर हमेशा बारूद, तंबाकू और पुरानी चमड़ी की गंध आती थी। सोफ़ा, बारह साल पहले एक ट्रक के पिछवाड़े से उतारकर यहाँ लाया गया था। उस दिन से वह दो आदमियों का राजसिंहासन बना हुआ था।
बाएँ तरफ़ बैठे व्यक्ति का नाम मर्त था। उसकी दाढ़ी सीने तक आती थी, और उसकी गर्दन पर पड़ी ज़ंजीर हर साँस के साथ हल्की सी झनकती थी। दाएँ तरफ़ बैठा था बारन। उसका टैटू ज़्यादा घना था; उसकी बाहें, कंधे, सीने पर ऊपर से नीचे तक कहानियाँ बयान करते थे। दोनों की उम्र एक जैसी थी, एक ही मोहल्ले में पले-बढ़े थे, एक ही लड़ाइयाँ साझा की थीं। लेकिन कोई भी उन्हें “दोस्त” के रूप में नहीं पहचानता था। उनके लिए ज़्यादा उपयुक्त शब्द था “साथी”। या शायद “भाई”। लेकिन सबसे सटीक शब्द था: एक-दूसरे का आईना।
मर्त अपने हाथ में पकड़ी पिस्तौल को गोद में घुमाता रहा। बैरल ठंडा था, अभी तक साफ़ नहीं हुआ था। कल के काम से बचा एकमात्र संकेत वही था। बारन ने सिगरेट से गहरी साँस ली, धुएँ को अपनी नाक से निकालते हुए उसकी आँखें आधी बंद थीं.
“कितना?” मर्त ने पूछा, उसकी आवाज़ गहरी और थकी हुई थी।
बारन ने कंधे उचकाए। “गिनना बंद कर दिया। तुमने?”
“मैंने भी।”
दोनों हँस पड़े। एक छोटी, खराखराहट भरी, अंतरंग न होने वाली हँसी। बाहर से देखने वाला इसे कठोरता समझता। लेकिन यह जीवित रहने के कारण मिलने वाली अजीब सी राहत की आवाज़ थी।
टेलीविज़न चालू था, लेकिन आवाज़ कम थी। स्क्रीन पर एक कोबॉय फ़िल्म चल रही थी; धूल भरी सड़कें, टोपी वाले लोग, एक ही शॉट में ख़त्म होने वाले झगड़े। दोनों इसे देख नहीं रहे थे। वैसे भी वास्तविक जीवन में उन्होंने काफ़ी कोबॉयगिरी की थी।
बारन ने सिगरेट को अपने होंठों के बीच पकड़ते हुए पूछा:
“आज रात हम क्या कर रहे हैं?”
मर्त ने पिस्तौल को कुर्सी के किनारे पर रख दिया, अपने हाथों को जींस के ऊपर रख दिया। उसकी उंगलियाँ अभी भी बारूद की गंध से भरी थीं।
“कुछ नहीं,” उसने कहा। “एक रात के लिए कुछ भी नहीं करते।”
बारन ने एक पल के लिए रुका। फिर उसने धीरे से सिर झुकाया, मर्त की ओर देखा। उनकी नज़रें मिलीं। उस नज़र में अठारह साल की लड़ाई, अठारह साल की वफ़ादारी, अठारह साल की थकान थी।
“ठीक है,” बारन ने आख़िरकार कहा। “लेकिन कल?”
मर्त ने गहरी साँस ली। उसका सीना उठा-उठा कर गिरा।
“कल फिर वही कहानी होगी।”
बारन ने सिर