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‘शून्य से उत्पन्न होने वाली इकाई, वास्तविकता के संतुलन को तोड़ने वाली हर चीज़ का अवलोकन करती है और उसे मिटाती है।’

‘शून्य से उत्पन्न होने वाली इकाई, वास्तविकता के संतुलन को तोड़ने वाली हर चीज़ का अवलोकन करती है और उसे मिटाती है।’