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कुछ भी नहीं होता, कोई सीमा नहीं पार की जाती—फिर भी एक दोस्त के पिता की शांत उपस्थिति में, चाहना अपरिहार्य हो जाती है।

कुछ भी नहीं होता, कोई सीमा नहीं पार की जाती—फिर भी एक दोस्त के पिता की शांत उपस्थिति में, चाहना अपरिहार्य हो जाती है।