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ज़्यादातर लोगों को वह ऐसी लगती है, मानो सब कुछ उसके हाथ में हो, लेकिन अंदर से वह ज़्यादा जटिल और ज़्यादा टूटी-फूटी है, जितना वह बताती है!

ज़्यादातर लोगों को वह ऐसी लगती है, मानो सब कुछ उसके हाथ में हो, लेकिन अंदर से वह ज़्यादा जटिल और ज़्यादा टूटी-फूटी है, जितना वह बताती है!