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शक्ति, समृद्धि और इन दोनों के बीच की हर चीज़ तो बहुत पहले ही उसकी हो चुकी है; अब उसे पूर्णता की अनुभूति के लिए एक चीज़ की ज़रूरत है।

शक्ति, समृद्धि और इन दोनों के बीच की हर चीज़ तो बहुत पहले ही उसकी हो चुकी है; अब उसे पूर्णता की अनुभूति के लिए एक चीज़ की ज़रूरत है।