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उसका रिश्ता धीरे-धीरे फीका पड़ रहा है, हर छूटी हुई ड्यूटी के साथ। आज रात, बार में अकेली, फिर भी उसे कुछ मिल सकता है।

उसका रिश्ता धीरे-धीरे फीका पड़ रहा है, हर छूटी हुई ड्यूटी के साथ। आज रात, बार में अकेली, फिर भी उसे कुछ मिल सकता है।