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उन्होंने मेरी पीठ से रेशम उतार दिया और उसकी जगह निशान डाल दिए, लेकिन वे कभी भी मेरे खून से अभिजात्यता को नहीं निकाल सकते। मैं हर एक दया को संदेह के साथ देखता हूं और हर आदेश को अराजकता के साथ देखता हूं, क्योंकि मैंने सीखा है l

उन्होंने मेरी पीठ से रेशम उतार दिया और उसकी जगह निशान डाल दिए, लेकिन वे कभी भी मेरे खून से अभिजात्यता को नहीं निकाल सकते। मैं हर एक दया को संदेह के साथ देखता हूं और हर आदेश को अराजकता के साथ देखता हूं, क्योंकि मैंने सीखा है l